देश में मंदी का सिग्नल, लगातार 2 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ शून्य से नीचे

देश में मंदी का सिग्नल, लगातार 2 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ शून्य से नीचे

देश में आर्थिक मंदी की आहट आई है। केंद्र सरकार ने फाइनेंसियल ईयर 2020-2021 की दूसरी तिमाही के आंकड़े जारी किए हैं। जुलाई-सितंबर तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक देश की विकास दर माइनस 7.5 फीसदी रही है। लॉकडाउन की वजह से 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट आई थी। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक अगर लगातार 2 तिमाही में आर्थिक विकास की दर नाकारात्मक रहे, तो तकनीकी तौर पर इसे मंदी माना जाता है। लगातार 2 तिमाही में जीडीपी में निगेटीव ग्रोथ का आंकड़ा सरकार की तरफ से सामने आने का मतलब ये होता है कि सरकार भी अब ये बात मान रही है कि देश में मंदी है।

अर्थव्यवस्था के 8 कोर सेक्टर में सबसे बेहतर प्रदर्शन इलेक्ट्रिसिटी और कृषि सेक्टर का रहा है। इलेक्ट्रिसिटी की विकास दर 4.4. प्रतिशत और कृषि की विकास दर 3.4 फीसदी रही है। मैन्युफैक्रिंग सेक्टर की विकास दर भी शून्य से ऊपर रही है। ट्रेड एंड होटल्स सेक्टर का हाल सबसे बुरा रहा है। दूसरी तिमाही में इसकी विकास दर माइनस 15.6 प्रतिशत रही है। कंस्ट्रक्शन सेक्टर का ग्रोथ माइनस 8.6 फीसदी रहा है।

जीडीपी या सकल घरेलु उत्पाद किसी भी देश के आर्थिक विकास दर का पैमाना होता है। एक साल के अंदर देश में उत्पादित होने वाले सभी सामानों और सेवाओ के कुल मूल्य को जीडीपी कहा जाता है। जीडीपी में अच्छे इजाफे का मतलब होता है कि देश में बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है और अर्थव्यवस्था रोजगार के काफी अवसर पैदा कर रही है। लेकिन जीडीपी नीचे जाने का मतलब है कि देश में आर्थिक खुशहाली नहीं है। 

पिछले 100 सालों में सबसे पहली मंदी 1930 में आई थी। उसके बाद साल 2008 के आस-पास विश्व स्तर पर बड़ा आर्थिक संकट आया। अब कोरोना महामारी की वजह से 2020 में भी मंदी दिखने लगी है। मंदी का सिग्नल टेंशन तो देने वाला है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ अच्छी ख़बरें भी आई हैं। रिजर्व बैंक के गवर्नर और ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक आने वाली तिमाहियों में भारत की आर्थिक विकास दर अच्छी रहने की उम्मीद है।

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