बिहार की सियासत का नया ‘चिराग’

बिहार की सियासत का नया ‘चिराग’

हाथ में कलावा और माथे पर तिलक। बिहार की राजनीति में पहली बार कोई हिंदू हृदय सम्राट बनने निकला है। नाम है चिराग पासवान। पिता रामविलास पासवान के निधन के बाद चिराग मीडिया के कैमरों के सामने जब भी दिखे हैं, उनके शरीर पर कलावा और तिलक जरूर दिखा है। अपने पिता के अंतिम संस्कारों से जुड़े सारे कर्मकांडों में भी चिराग ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और उसे महज औपचारिकता तक नहीं छोड़ा। बार-बार खुद को मोदी भक्त का तमगा देकर एलजेपी अध्यक्ष ने बिहार के उस खास वर्ग को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश की है, जो कट्टर हिंदुत्व का चेहरा है।

चिराग के इस बदले व्यक्तित्व ने उन आलोचकों का मुंह फिलहाल बंद कर दिया, जो रामविलास पासवान के निधन के बाद लोक जनशक्ति पार्टी के भविष्य पर सवाल उठा रहे थे। बीजेपी की तारीफ कर और नीतीश के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल कर चिराग ने एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है। मोदी भक्तों की नज़र में अपने लिए सहानुभूति तो पैदा की ही, जनता के सामने खुद को नीतीश के विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश की है। संदेश ये दिया है कि जब महज ढाई फीसदी कुर्मी वोटर वर्ग से आने वाले नीतीश 15 साल तक बिहार की सत्ता के शीर्ष पर बैठ सकते हैं, तो पांच फीसदी पासवान मतदाता वर्ग से आने वाले चिराग पासवान बिहार का सियासी भविष्य क्यों नहीं बन सकते हैं। चिराग फिल्डिंग तो 2020 के चुनाव में सजा रहे हैं, लेकिन उनकी नज़र 2025 के मैच पर है। 69 साल के नीतीश कुमार पांच साल बाद 74 साल के बुजुर्ग हो जाएंगे। उनके परिवार से कोई पार्टी में है नहीं, ऐसे में जेडीयू का भविष्य क्या होगा इसको लेकर गारंटी के साथ कोई कुछ नहीं कह सकता। यानी अगले चुनाव में बीजेपी को बिहार में जिस साथी की जरूरत सबसे ज्यादा होगी, वो चिराग पासवान हो सकते हैं। अकेले चुनाव लड़ने का चिराग का फैसला नतीजों के बाद आंकड़ों के लिहाज से कामयाब साबित हो सकता है। किसी गठबंधन में ना होने की वजह से एलजेपी इस बार ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है तो वोट परसेंटेज भी ज्यादा होने की उम्मीद है। यानी अगर सीटें कम भी आईं तो चिराग पासवान मत प्रतिशत का हवाला देकर अपनी कामयाबी का डंका पीट सकते हैं। पिछले कुछ दिनों में चिराग ने जो कुछ भी किया, जो कुछ भी कहा, उससे वो बिहार की जनता के नोटिस में आ गए और ये कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। एक सवाल ये भी है कि चिराग पासवान की जो राजनीति रणनीति दिख रही है, उसके पीछे कौन है? किसका दिमाग चल रहा है? थ्योरी 2 है। एक थ्योरी ये है कि सबकुछ बीजेपी करा रही है ताकि नीतीश को कमजोर किया जा सके। दूसरी थ्योरी ये है कि चिराग अपना एक-एक दांव प्रशांत किशोर के इशारे पर चल रहे हैं। दिमाग किसी का भी हो, बिहार की सियासत में एक चिराग का उदय हो चुका है। ये चिराग बीजेपी, जेडीयू और आरजेडी जैसे सियासी तूफानों के बीच कितनी रोशनी फैलाता है, इसका इंतज़ार पूरे देश को रहेगा।

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आर के सिंह सलाहकार संपादक

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