बिहार चुनाव में क्या NDA का खेल बिगाड़ेंगे चिराग पासवान?

बिहार चुनाव में क्या NDA  का खेल बिगाड़ेंगे चिराग पासवान?

बिहार चुनाव में इस बार जंग ज़बरदस्त है। बिहार में सत्ता के लिए संघर्ष में एक तरफ बिना लालू यादव के सियासी अखाड़े में उतरा कांग्रेस और आरजेडी का महागठबंधन है, तो दूसरी तरफ JDU, BJP, VIP और HAM जैसी चार पार्टियों का गठजोड़ NDA, जो चुनावी समर में दो-दो हाथ करने के लिए कमर कसकर तैयार है। तीसरा गठबंधन RLSP के उपेंद्र कुशवाहा की अगुवाई में बना है, जो 6 पार्टियों का ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर एलाएंस है। लेकिन इन सबके बीच बिहार चुनाव में चौंकाने वाली एंट्री चिराग पासवान की पार्टी LJP की हुई है । बिहार का चैंपियन बनने की चाह में चिराग की पार्टी NDA से अलग होकर अकेले अपने बूते चुनाव लड़ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सीने में छुपाकर घूम रहे चिराग पासवान नीतीश कुमार का गणित बिगाड़ेंगे। चुनाव के बीच बीजेपी पर आरोप लगे हैं कि एलजेपी बीजेपी की बी टीम है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि एलजेपी ने 143 सीटों पर उम्मीदवारों खड़ा करने का एलान किया है। चिराग पासवान ने उन सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं जहां से जेडीयू चुनाव लड़ रही है, लेकिन बीजेपी के खिलाफ वो अपने उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। चुनाव प्रचार में भी चिराग चिल्ला-चिल्लाकर लोगों को बता रहे हैं कि मोदी तुझसे बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं। चिराग ने बार-बार खुद को पीएम मोदी का हनुमान भी बताया। सियासी पंडितों का मानना है कि चिराग का ये खुल्लम खुल्ला चैलेंज नीतीश कुमार को चौथी बार सीएम बनने की राह में बड़ा कांटा साबित हो सकता है।

एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ज़मीनी स्तर पर जेडीयू और नीतीश कुमार को तो नुकसान पहुंचा ही रहे हैं, अपने बयानों से वो बीजेपी को भी धर्मसंकट में डाल रहे हैं। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि बीजेपी नेताओं को अब सफाई देना पड़ रहा है। जब आरोप लगने लगे कि बीजेपी की शह पर ही चिराग नीतीश के खिलाफ चुनावी मैदान में अकेले दम पर दो-दो हाथ कर रहे हैं, तो शुक्रवार को एक साथ बीजेपी के कई बड़े नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने साफ-साफ कहा कि चिराग पासवान बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का नाम लेकर सिर्फ जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, रविशंकर प्रसाद, बिहार के प्रभारी देवेंद्र फड़नवीस, उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी और भूपेंद्र यादव ने एक स्वर में चिराग पासवान पर हमला बोला और खुलकर उनके उम्मीदवारों को वोट कटवा कह दिया।

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय में चिराग पासवान को जेडीयू के खिलाफ अकेले खड़े होने में बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं का आशीर्वाद ज़रूर मिला था। इसके पीछे बीजेपी का ये गलत आकलन हो सकता है कि चिराग जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारकर नीतीश कुमार की पार्टी की ही हार सुनिश्चित करेंगे, जिसका फायदा उठाकर बीजेपी बाद में सीएम पद की दावेदारी ठोंक सकती है। लेकिन चुनाव प्रचार ज़ोर पकड़ते ही बीजेपी के आला नेताओं को ज़मीनी स्तर पर उल्टा फिडबैक मिला। अब नीतीश के परंपरागत वोटर चिराग के आक्रामक तेवर के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार मान रहे हैं। इसका असर चुनाव प्रचार में दिखने भी लगा है, इन वोटरों में गहरी उदासीनता है। अब बीजेपी को लग रहा है कि कहीं नुकसान उनकी पार्टी को भी ना हो जाए। इसलिए पार्टी के बड़े नेता अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं।

सियासी पंडित ये भी मान रहे हैं कि जेडीयू और एलजेपी के बीच मतभेद का फायदा महागठबंधन को मिल सकता है। कारण कि एलजेपी और जेडीयू की सीधी टक्कर में NDA का वोट बैक इन्ही पार्टियों में बंटेगा। ये बात अब बीजेपी को भी समझ मे आ रही है। यही कारण है कि वोटकटवा बताकर अब पार्टी सीधा हमला चिराग पासवान पर कर रही है।

उधर, चिराग पासवान भी बीजेपी के नए तेवर से बैकफुट पर हैं। इसलिए शनिवार आते-आते वोटकटवा कहने पर वो अब बीजेपी के खिलाफ हमलावर हो गए हैं। वोटकटवा के सवाल पर चिराग ने बीजेपी से ही सीधा सवाल पूछ दिया कि अगर उनकी पार्टी वोटकटवा थी, तो 2014 से NDA में साथ क्यों रखा।

कुल मिलाकर अब सबकी नज़रें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों पर है। देखना दिलचस्प होगा कि 23 अक्टूबर को पीएम मोदी चिराग की सियासी तेवर का कैसे जवाब देते हैं। इतना तो तय है कि जनता का रुख भांपने वाले पीएम मोदी NDA  की जीत तय करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे, चाहे इसके लिए चिराग पासवान को अलग-थलग ही क्यों करना पड़े।

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शिवेंद्र कुमार तिवारी संपादक

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