बिहार में नहीं बहार, फिर भी नीतीश कुमार !

बिहार में नहीं बहार, फिर भी नीतीश कुमार !

बिहार चुनाव में इस बार बिल्ली के भाग से छींका टूटने के आसार नज़र आ रहे हैं। 2 चरण के मतदान के बाद के रुझान से लगता है कि जंगलराज का डर नीतीश कुमार के लिए वरदान साबित हो सकता है। दूसरे चरण के मतदान में हवा का रुख़ बदलता हुआ साफ-साफ दिखने लगा है। पहले चरण में 71 सीटों पर वोट डाले गए थे। ये इलाका महागठबंधन का गढ़ माना जाता है। चुनाव बाद का एक अंदरुनी सर्वे ये कहता है कि 71 सीटों में से 38 पर महागठबंधन और 30 पर एनडीए को बढ़त हासिल है। यानी महागठबंधन ने पहले फेज में बाजी तो मार ली है, लेकिन सीटों का अंतर बहुत ज्यादा का नहीं रहेगा। दूसरे फेज की वोटिंग में एनडीए ने कमबैक किया है। दूसरे दौर की 94 सीटों में से एनडीए कम से कम 55 सीटें जीतेगा और महागठबंधन महज 36 सीटों तक सिमित रह सकता है। तीनों फेज मिलाकर बात की जाए तो एनडीए को 130 और महागठबंधन को 80 सीटों पर जीत मिल सकती है। बाकी सीटें अन्य के खाते में होंगी।

पटना जिले की 9 सीटों में से 6 पर यानी बांकीपुर, दीघा, कुम्हरार, फुलवारीशरीफ, दानापुर, पटना साहिब में एनडीए की जीत हो सकती है। बख्तियारपुर, फतुहा, मनेर से महागठबंधन जीत सकता है।

बक्सर जिले में कुछ दिन पहले तक एनडीए के जितने बुरे हालात दिख रहे थे, उतने वोटिंग के दिन दिखे नहीं। बक्सर सीट पर बीजेपी के परशुराम चतुर्वेदी की जीत के आसार हैं। राजपुर में जेडीयू के संतोष निराला का पलड़ा भारी नज़र आ रहा है। डुमरांव सीट पर भी जेडीयू जीत सकती है क्योंकि निवर्तमान विधायक ददन पहलवान ने आरजेडी के यादव वोट में जबर्दस्त सेंधमारी की है और इसका फायदा जेडीयू की अंजुम आरा को मिल सकता है। ब्रह्मपुर सीट पर बाहुबली सुनील पांडे के भाई एलजेपी उम्मीदवार हुलास पांडेय ने एनडीए का खेल खराब कर दिया है और इसका फायदा आरजेडी के शंभूनाथ सिंह यादव को मिलने की उम्मीद है। आरजेडी नहीं जीती तो हुलास पांडेय जीतेंगे और इतना करीब-करीब तय है कि एनडीए कैंडिडेट तीसरे नंबर पर रहेगा।

सीवान जिले की 8 में से 6 सीट पर एनडीए को बढ़त दिख रही है। पिछली बार एनडीए 6 सीट पर हार गई थी। सीवान, गोरियाकोठी,  दरौंदा और दरौली सीट पर बीजेपी की जीत के आसार हैं। महाराजगंज, बड़हड़िया सीट से जेडीयू जीत सकती है। महागठबंधन का पलड़ा रघुनाथपुर और जीरादेई में भारी दिख रहा है।

आरजेडी का गढ़ रहे सारण जिले की 10 में से 6 पर एनडीए को जीत मिल सकती है। अमनौर, तरैया, मढौरा, छपरा, परसा, सोनपुर में एनडीए जीत सकता है। मांझी, बनियापुर, गरखा में महागठबंधन विजयी हो सकता है। एकमा की सीट पर कांटे की टक्कर है।

गोपालगंज की 6 सीटों में एनडीए 5 और महागठबंधन एक सीट पर जीत हासिल कर सकती है। वैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज में बीजेपी की जीत की उम्मीद है। कुचायकोट, भोरे में जेडीयू को बढ़त दिख रही है। हथुआ में आरजेडी जीत सकती है।

पूर्वी और पश्चिमी चंपारण की 9 में से 5 सीटों पर एनडीए तो तीन सीटों पर महागठबंधन का पलड़ा भारी नज़र आ रहा है। एक सीट पर कांटे की टक्कर है।

मुजफ्फरपुर जिले में बराबरी का मुकाबला है। बरुराज, पारू में एनडीए तो मीनापुर, कांटी में महागबंधन आगे दिख रहा है। साहेबगंज में कोई भी जीत सकता है।

2 फेज के रुझान सामने आने के बाद अब दोनों गठबंधन सारा जोर तीसरे चरण के मतदान पर लगा रहे हैं। नीतीश कुमार ने सीमांचल में कैंप कर दिया है। यहां एनडीए को अपनी ताक़त से ज्यादा महागठबंधन के वोट बैंक में बिखराव से फायदा मिलने की उम्मीद है। मुस्लिम वोट बंट सकते हैं और अगर बंटे तो एनडीए को इसका सीधा लाभ होगा। किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया में मुसलमान वोटर 38 से लेकर 70 फीसदी तक है। कुछ साल पहले तक यहां की सियासत पर तसलीमुद्दीन की मजबूत पकड़ थी। उनकी मौत के बाद ओवैसी ने अपनी ज़मीन तैयार करने की कोशिश की है। उपेंद्र कुशवाहा और मायावती की पार्टी से गठबंधन कर ओवैसी ने सीमांचल में एक विकल्प तैयार करने और खुद के ऊपर से वोटकटवा का लेबल हटाने की कोशिश की है। एक दिलचस्प हकीकत ये भी है कि पिछले कुछ सालों में सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में बिरयानी की दुकानों की तादाद खूब बढ़ी है। इन दुकानों को हैदराबादी ओवैसी की पार्टी के बढ़ते प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव ये तय करेगा कि सीमांचल की जनता को क्या चाहिए, नई पीढ़ी की पसंद बिरयानी या पुरानी पीढ़ी की फेवरेट दाल-भात-चोखा। सीमांचल क्या चाहता है ये नतीजे आने के दिन पता चलेगा। 10 नवंबर को ये भी पता चलेगा कि मोदी और नीतीश का जो क्रेज महिला मतदाताओं में था, वो अब भी कायम है या नहीं। क्योंकि अगर आधी आबादी अब भी इनके साथ है तो बिहार में एनडीए की चुनावी नैया हर भंवर से निकल जाएगी। चुनाव के आखिरी दौर में नीतीश कुमार ने अपना अंतिम दांव भी चल दिया है। गुरुवार को एक चुनावी रैली में नीतीश ने 2020 के चुनाव को अपना अंतिम चुनाव कह कर इमोनशन कार्ड भी खेल दिया। नीतीश को फेयरवेल किस तरह देना है ये अब बिहार की जनता को तय करना है।

आर के सिंह सलाहकार संपादक

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