बिहार में बीजेपी की फ्री कोरोना वैक्सीन के वादे से चुनाव जीतेंगे नीतीश?

बिहार में बीजेपी की फ्री कोरोना वैक्सीन के वादे से चुनाव जीतेंगे नीतीश?

बिहार चुनाव अब पूरे रोमांच में आ चुका है। सभी पार्टियों ने चुनावी जंग जीतने के लिए अपने-अपने वायदों का पिटारा खोल दिया है। आरजेडी ने अपने घोषणा पत्र में 10 लाख सरकारी नौकरियों का वादा कर 15 साल से सत्ता पर काबिज़ सीएम नीतीश कुमार को बैकफुट पर ला दिया। लेकिन गुरुवार को बीजेपी ने अपना विज़न डॉक्यूमेंट जारी कर अपने सहयोगी नीतीश कुमार को थोड़ी राहत दी है। बीजेपी ने नहले पर दहला मारते हुए बिहार में 19 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया है, जिसमें 3 लाख शिक्षकों की नियुक्ति भी शामिल है।

इसके साथ बीजेपी ने बिहारवासियों को फ्री में कोरोना वैक्सीन देने का भी वादा किया है। हालांकि इस वादे के साथ एक विवाद भी खड़ा हो गया। बीजेपी की इस चुनावी घोषणा के बाद सारा विपक्ष एकस्वर में बीजेपी को घेरने में जुट गया। अब विपक्षी पार्टियां सवाल उठा रही हैं कि क्या कोरोना का टीका बीजेपी का है या इसपर पूरे देश का हक़ होगा। सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर वैक्सीन से वोट का सौदा क्यों हो रहा है। मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि ‘ये जानने के लिए कि वैक्सीन और झूठे वादे आपको कब मिलेंगे, कृपया अपने राज्य में चुनाव की तारीख देखें।‘ अलग-अलग पार्टियां बीजेपी पर अलग-अलग तरीके से हमला कर रही हैं। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि ‘कोरोना का टीका देश का है, बीजेपी का नहीं। टीका का राजनीतिक इस्तेमाल दिखाता है कि इनके पास बीमारी और मौत का भय बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।‘ शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि ‘बीजेपी इलाज के नाम पर भी बंटवारा कर रही है।‘ हालांकि बिहार बीजेपी के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने सफाई में कहा कि केंद्र सरकार कोरोना वैक्सीन न्यूनतम दर पर सभी को उपलब्ध कराएगी। वहीं, बिहार में सरकार बनने पर हम बिहार के लोगों को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराएंगे। राजनैतिक पार्टियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सभी दलों को इसपर संवेदेनशील होना चाहिए।  

ये सही है कि फ्री कोरोना वैक्सीन की घोषणा का विरोध सारी पार्टियां कर रही हैं। लेकिन चुनावी वादों के रथ पर सवार होकर सत्ता के दरवाज़े तक पहुंचना सारी पार्टियों की फितरत रही है और बीजेपी इससे अलग नहीं है। फिर चाहें विधानसभा चुनाव हों, या लोकसभा चुनाव, हर पार्टियां लोगों को रिझाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाती हैं। नीतीश सरकार पर कोरोना महामारी से निपटने में लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में फ्री कोरोना वैक्सीन को अपने विज़न डॉक्यूमेंट में शामिल करके बीजेपी ने तमाम गरीब और पिछड़े तबके को साधने की कोशिश की है। बीजेपी ने ये संदेश देने की कोशिश की है कि लोगों के स्वास्थ्य को लेकर NDA  गंभीर है। बीजेपी की इस चुनावी घोषणा का मतदाताओं पर कितना असर होगा, ये चुनाव नतीजों के बाद ही पता चलेगा। लेकिन जब पार्टी पर कोरोना महामारी के ख़राब प्रबंधन का आरोप हो,  तो फ्री वैक्सीन का सपना दिखाना मृग मरीचना के समान है।

अब दिलचस्प ये है कि मुफ्त वैक्सीन के एलान के बाद कम से कम देश के दूसरे राज्यों में फ्री कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने की होड़ शुरू हो गई है। बिहार के बाद अब मध्य प्रदेश और यूपी की सरकारों ने भी मुफ्त कोरोना वैक्सीन मुहैया कराने का एलान किया है। दूसरे राज्यों पर भी दवाब बनने लगा है कि वो फ्री कोरोना वैक्सीन की घोषणा करें।

हालांकि इस समय भारत सहित दुनियाभर में वैक्सीन पर ट्रायल चल रहा है, इस काम के पूरा होने में कम से कम और 4-6 महीने का वक्त लग सकता है। लोगों तक पहुंचाने में और वक्त लग सकता है। ऐसे में चुनावी घोषणा पत्र का इसे हिस्सा बनाना अच्छी रणनीति कतई नहीं कही जा सकती।

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शिवेंद्र कुमार तिवारी संपादक

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