कृषि कानूनों पर अस्थायी रोक के लिए तैयार सरकार, प्रस्ताव पर 22 जनवरी को जवाब देंगे किसान

कृषि कानूनों पर अस्थायी रोक के लिए तैयार सरकार, प्रस्ताव पर 22 जनवरी को जवाब देंगे किसान

कृषि कानूनों पर करीब 2 महीने से जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार अब बीच का रास्ता निकालने में जुट गई है। किसान संगठनों के साथ 10वें दौर की बातचीत में सरकार ने कृषि कानून पर डेढ़-दो साल के लिए अस्थायी रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। किसान संगठन अब प्रस्ताव पर आपस में चर्चा के बाद 22 जनवरी को होने वाली वार्ता में जवाब देंगे।

सरकार ने 40 किसान संगठनों के साथ बुधवार को हुई बातचीत में कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट देकर कृषि कानून पर डेढ़-दो साल तक रोक लगाने के लिए तैयार है। इस दौरान एक कमेटी का गठन किया जाएगा, जो तीनों कृषि कानून पर अपनी राय देगी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार और किसानों के नुमाइंदो की कमेटी जो राय देगी उसके बाद तीन कृषि कानून और एमएसपी के भविष्य पर फैसला किया जाएगा।

किसानों के साथ बैठक के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज हमारी कोशिश थी कि कोई फैसला हो जाए। किसान यूनियन कानून वापसी की मांग पर अड़ी थी और सरकार संशोधन के लिए तैयार थी। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय के लिए कृषि सुधार क़ानूनों को स्थगित किया है। सरकार एक-डेढ़ साल तक कानून को स्थगित करने के लिए तैयार है। इस दौरान किसान यूनियन और सरकार बात करें और समाधान ढूंढे।

उधर, सरकार से बातचीत के बाद किसान नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा कि सरकार कोर्ट में एफिडेविट देकर कानून को डेढ़-दो साल तक होल्ड पर रखने के लिए तैयार है। सरकार ने कहा कि एक कमेटी बनाकर उसपर चर्चा करेंगे। कमेटी जो रिपोर्ट देगी, हम उसको लागू करेंगे। हम 500 किसान संगठन हैं, कल हम सबसे चर्चा करके 22 जनवरी को अपना जवाब देंगे।

बता दें तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा के किसान करीब 2 महीने से दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के साथ उनकी 10 दौर की बातचीत हो चुकी है। अब 22 जनवरी को 11वें दौर की बातचीत होगी। अगर किसान संगठन सरकार के प्रस्ताव को मान लेते हैं, तो पिछले 2 महीने से जारी गतिरोध पर विराम लग सकता है। अगर बातचीत फेल होती है, तो ये लड़ाई और लंबी खींच सकती है।  

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