किसानों के मुद्दे पर संसद में हंगामा, 6 फरवरी को चक्का जाम करेंगे किसान

किसानों के मुद्दे पर संसद में हंगामा, 6 फरवरी को चक्का जाम करेंगे किसान

कृषि कानून के खिलाफ आज मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर बाधित रही। विपक्षी दलों के भारी शोर-शराबे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दो बार और राज्यसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी पार्टियां दोनों ही सदन में  किसानों के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रही थीं।

लोकसभा में भारी हंगामा

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के सांसद अध्यक्ष के आसन के पास आकर नारेबाज़ी करने लगे। विपक्षी दलों के सांसद सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस करने की मांग कर रहे थे। प्रश्नकाल में कांग्रेस सदस्यों के शोर-शराबे में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी मौजूद थे। शिवसेना सांसदों के साथ अकाली दल सांसद हरसिमरत कौर ने भी कृषि कानूनों के विरोध में अपनी आवाज़ बुलंद की।

राज्यसभा में भारी शोर-शराबा

राज्यसभा में भी कृषि कानून को लेकर भारी शोर-शराबा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कृषि कानून के खिलाफ विपक्षी दलों ने चर्चा की मांग करके हुए शोर-शराबा शुरू कर दिया। राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू ने सांसदों से बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बात रखने के लिए कहा। लेकिन कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आज़ाद, तृणमूल नेता सुखेंदुं शेखर रॉय सहित विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।

6 फरवरी को देशभर में चक्का जाम

कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 2 महीने से किसानों का आंदोलन जारी है। इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने आंदोलन को तेज़ करते हुए 6 फरवरी को देशभर में चक्का जाम करने का एलान किया है। किसान दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक सड़क जाम करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने ये फैसला बजट में किसानों की अनदेखी, प्रदर्शन स्थल पर इंटरनेट बैन और कई अन्य मुद्दों को लेकर किया है।

किसान नेताओँ का आरोप है कि बजट में उनके मुद्दों की अनदेखी हुई है। साथ ही सरकार उनके आंदोलन को कुचलने के लिए हर हथकंडे अपना रही है। धरना स्थल पर पानी और इंटरनेट को बंद कर दिया गया है।

गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा के किसान पिछले दो महीने से भी ज्यादा वक्त से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर कृषि कानूनों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा तीनों कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार संशोधन की बात कह रही है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि बातचीत में सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी है।

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