आसान शब्दों में समझिए किसान बिल

आसान शब्दों में समझिए किसान बिल

6 महीने बाद संसद खुली तो सरकार एक ऐसा बिल ले आई, जिससे खेल-खलिहान में हंगामा मच गया। किसानों के मन में आशंकाओं के बादल मंडराने लगे। पंजाब, हरियाणा और यूपी में अन्नदाता विरोध-प्रदर्शन करने लगे। ये हंगामा इसलिए बरपा क्योंकि किसानों के मन में सवाल थे। किसी ने कहा कि सरकार अनाज मंडियों को बंद कर देगी तो किसी ने दावा किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म कर दिया जाएगा। हालात ऐसे बन गए कि खुद प्रधानमंत्री को सामने आकर एक-एक अफवाह की सच्चाई सामने रखनी पड़ी। प्रधानमंत्री ने साफ-साफ कह दिया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले जैसा ही होगा, और नया कानून किसानों को कई नए अधिकार देगा जिससे उनकी खुशहाली का रास्ता साफ होगा। नए कृषि विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक अन्नदाता अपनी फसल मनचाही जगह बेच सकेंगे। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के जरिए भी फसल बेची जा सकेगी और किसानों को दूसरे राज्यों में भी जाकर अनाज बेचने की छूट होगी। नए नियम से कृषि उत्पाद पर एपीएमसी यानी कृषि उत्पाद विपणन समिति का अधिकार खत्म हो जाएगा, किसान अढ़ातियों के आगे मजबूर नहीं होंगे, अपनी मर्जी से अपनी पसंद की जगह पर जाकर अपना अनाज बेच सकेंगे और ज्यादा पैसे कमा सकेंगे। आसान शब्दों में कहें तो नया विधेयक किसानों की आर्थिक आज़ादी लाने वाला जरिया साबित हो सकता है। सरकार का दावा है कि कांग्रेस ने खुद अपने घोषणा पत्र में एपीएमसी को ख़त्म करने का वादा किया था, लेकिन अब उसने इस बिल के ख़िलाफ़ हल्ला बोल दिया है। विपक्ष की हुंकार पर किसान सड़कों पर तो आ गए, लेकिन अब धीरे-धीरे उनकी समझ में कृषि कानून के प्रावधान आने लगे हैं। सरकार किसानों को ये समझाने में लगी है कि कृषि विधेयक उनका दुश्मन नहीं बल्कि कृषि सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार की ये कोशिश कामयाब होती है तो कृषि कानून मोदी सरकार की उपलब्धियों के पिटारे में एक नगीना साबित हो सकता है।

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