भारत ने चीन को दिया जोर का झटका, ड्रैगन की साज़िश ‘’डिरेल’’

भारत ने चीन को दिया जोर का झटका, ड्रैगन की साज़िश ‘’डिरेल’’

नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों पर अपना ट्रांसपोर्ट सिस्टम बिछाने की चीन की साज़िश को भारत ने नाकाम कर दिया है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में रेल ट्रांसपोर्ट तो होगा, लेकिन इसका निर्माण चीन नहीं भारत करेगा। भारतीय कंपनी बिहार के रक्सौल से नेपाल के काठमांडू तक रेल नेटवर्क बिछाएगी। 136 किलोमीटर लंबे इस रेल रूट का काम नेपाल ने भारत की कंपनी को सौंप कर चीन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। रेल की पटरियां बिछाने का काम ‘’कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड’’ को सौंपा गया है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बनने वाले 136 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग का 42 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड होगा। ये ख़बर एक नेपाली वेबसाइट के हवाले से आई है।

नेपाल में अपना वर्चस्व कायम कर भारत के ख़िलाफ़ साज़िश रचने की कोशिश में लगा चीन तिब्बत से नेपाल तक रेल सेवा शुरू करने की फिराक में था। चीन की कोशिश थी कि वो अपना रेल प्रोजेक्ट काठमांडू तक ले जाए। 2008 से ही वो नेपाल से बातचीत कर रहा था। नेपाल के साथ उसकी कई दौर की वार्ता भी हुई। लेकिन चीन का प्रोजेक्ट मंज़ूर हो पाता उससे पहले ही भारत ने काठमांडू तक रेल लाइन बिछाने के काम की मंज़ूरी नेपाल से हासिल कर ली। नेपाल ने भारतीय कंपनी को DPR यानी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की इजाजत भी दे दी है। 

रेल प्रोजेक्ट को मंज़ूरी इस बात का संकेत है कि भारत और नेपाल के बीच संबंध एक बार फिर पटरी पर आ गए हैं। कुछ महीनों पहले दोनों देशों के बीच तनाव तब बढ़ गया था जब नेपाल ने भारत के 3 इलाकों को अपने नए नक्शे में शामिल कर लिया था। इस टकराव के बाद भारत और नेपाल के बीच कुटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू हुई। 2 महीने पहले भारत की खुफिया एजेंसी RAW के मुखिया नेपाल दौरे पर गए। इसके बाद भारत के सेना प्रमुख और विदेश सचिव भी नेपाल पहुंचे। भारतीय अधिकारियों के दौरों के बाद नेपाल के विदेश मंत्री दिल्ली दौरे पर आए और दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की पटकथा लिखी गई।  

नेपाल में चीन की रेलवे का पहुंचना भारत के लिए एक बड़ा ख़तरा हो सकता था। रेल नेटवर्क के जरिए ड्रैगन भारत की सीमा तक पहुंच सकता था। लेकिन काठमांडू से रक्सौल तक रेलवे ट्रैक का जिम्मा लेकर भारत ने चीन की चाल को नाकाम कर दिया है। अब आने वाले दिनों में भारत और चीन के संबंध और भी बेहतर होने के आसार नज़र आने लगे हैं।

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